Wednesday, May 18, 2022
Home ब्लॉग प्रगति का मंत्र

प्रगति का मंत्र

निस्संदेह नदियों को जोडऩे वाली परियोजनाएं यदि विस्थापन और पर्यावरणीय चिंताओं से मुक्त हों तो वे सूखे व जीविका के संकट से जूझ रही बड़ी आबादी के लिये वरदान साबित हो सकती हैं। परियोजना सूखे क्षेत्रों में समृद्धि की बयार ला सकती हैं। कभी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ योजना को तब अमलीजामा पहनाया जा सका जब यमुना की सहायक नदियों केन-बेतवा लिंक परियोजना को अंतत: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हरी झंडी दे दी गई। यह परियोजना यदि समय रहते सिरे चढ़ती है तो दशकों से पानी के संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड में हरियाली की बयार आएगी और इस क्षेत्र से होने वाले पलायन पर रोक लगेगी। उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के 13 जिलों में फैले बुंदेलखंड के लोगों को अगले दशक में हरियाली के चरागाह देखने को मिल सकते हैं।

दरअसल, लंबे समय से यह परियोजना कई बाधाओं का सामना कर रही थी क्योंकि दोनों राज्यों की सरकारें सहमति के आधार नहीं खोज पायी थी। बताया जा रहा है कि इस परियोजना पर करीब 44,605 करोड़ लागत का अनुमान है, जिसमें से अधिकांश राशि केंद्र सरकार से अनुदान के रूप में प्राप्त होगी। दरअसल, केन नदी से बेतवा नदी में जलराशि स्थानांतरित होने से करीब 10.62 लाख हेक्टयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी तथा करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके अलावा परियोजना का लक्ष्य 103 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना को अंजाम देना भी है। साथ ही सालाना 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने में इससे मदद मिलेगी। दरअसल, भारत में नदियों को जोडऩे की पुरानी महत्वाकांक्षी योजना रही है। यदि इतिहास पर नजर डालें तो नदियों को जोडऩे की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हो गई थी। लेकिन उल्लेखनीय तथ्य यह है कि शुरुआती परियोजनाओं का लक्ष्य अंतर्देशीय नेगिवेशन के उद्देश्यों को लेकर था। इसी कड़ी में पेरियार परियोजना को सन् 1895 में लागू किया गया था। इस परियोजना के अंतर्गत पेरियार बेसिन, जो आज केरल राज्य में है, से तमिलनाडु के बैगई बेसिन में जल स्थानांतरित किया जाता था।

दरअसल, कालांतर जनसंख्या वृद्धि के चलते यह परियोजना पानी संकट के चलते सिंचाई व पेयजल भंडारण की योजनाओं का आधार बनी। निस्संदेह, आज ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के बीच लगातार बढ़ते बाढ़ व सूखे के संकट में ऐसी परियोजनाएं कारगर समाधान प्रतीत होती हैं। दरअसल, इन विशाल परियोजनाओं की लागत, लाभ-हानि का विश्लेषण और लोगों के विस्थापन की चिंता के कारण समय-समय पर ऐसी परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने में संकोच होता रहा है। वहीं राज्यों की नदियों से जुड़ी लोगों की अस्मिता और राजनीतिक कारण भी ऐसी परियोजना को अंतिम रूप देने में बाधक बने हैं। कभी इनका समय आगे बढ़ाया गया तो कभी कदम पीछे खींचे गये। पानी की हिस्सेदारी को लेकर राज्यों में मतभेद भी इसमें बाधक बने हैं। हालिया उदाहरण के रूप में देखें तो दो साल पूर्व महाराष्ट्र सरकार ने पानी के बंटवारे पर असहमति के चलते गुजरात के साथ दो नदी जोड़ परियोजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए थे। विडंबना यह है कि राज्य में गुजरात व केंद्र की तरह भाजपा सरकार होने के बावजूद योजना सिरे न चढ़ सकी।

ऐसे में केन-बेतवा परियोजना को केंद्र के सहयोग से उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सरकारों द्वारा सिरे चढ़ाना देश के अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय पहल है। जिसका अनुसरण करके अन्य राज्य बड़ी आबादी के जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं। लेकिन यहां विचारणीय पहलू यह है कि ऐसी बड़ी परियोजनाओं को क्रियान्वित करते वक्त नागरिकों के विस्थापन, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाये। इन चिंताओं को दूर करते हुए विकास की राह चुनी जानी चाहिए। कह सकते हैं कि नदियां जुडेंगी, तो देश आगे बढ़ेगा क्योंकि सूखे व पेयजल का संकट देश में पलायन को बढ़ावा देता है। सही मायनो में यह देश की प्रगति का नया मंत्र है, क्योंकि जहां एक बड़े इलाके के लोगों को सूखे-बाढ़ से मुक्ति मिलेगी, वहीं कृषि उत्पादन बढऩे से क्षेत्र व देश में खुशहाली आयेगी।

RELATED ARTICLES

मौद्रिक उपाय पर सवाल

भारतीय रिजर्व बैंक ने बढ़ती मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मौद्रिक उपाय का सहारा लिया है। पहले कदम के तौर पर उसने ब्याज...

मानव बुद्धि: पहले पंखज्फिर पिंजरे!

हरिशंकर व्यास त्रासद सत्य है जो पृथ्वी के आठ अरब लोग अपना स्वत्व छोड़ते हुए घोषणा करते हैं कि हम फलां-फलां बाड़े (195 देश) के...

सबको पसंद है राजद्रोह कानून

अजीत द्विवेदी भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए यानी राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है लेकिन यह अंतिम जीत नहीं है। यह...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जारी विवाद के बीच साक्षी महाराज बोले- भगवान विष्णु के मंदिर को तोड़कर बनी है दिल्ली की जामा मस्जिद

ऋषिकेश। उन्नाव सांसद साक्षी महाराज आज मंगलवार को ऋषिकेश में स्थित अपने भगवान आश्रम पहुंचे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए साक्षी महाराज ने कहा...

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस विपिन सांघी होंगे नैनीताल हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस

नैनीताल। सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति विपिन सांघी को नैनीताल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की...

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आरटीओ पर मारा छापा, आरटीओ दिनेश पठोई को किया सस्पेंड

सीएम के आर टी ओ कार्यालय में पहुंचने की सूचना से मचा हड़कंप लेटलतीफी और कामों को लटकाने की शिकायतों के बाद सीएम ने किया...

खाई में गिरा वाहन, एसडीआरएफ ने चलाया सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन

देहरादून। आज दिनांक 18 मई 2022 को एसडीआरएफ टीम को जिला नियंत्रण कक्ष टिहरी से सूचना मिली की देवप्रयाग से 2 किलोमीटर पीछे एक...

गर्मियों में बचना है लू से तो जरूर अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

गर्मी अकेले नहीं आती, बल्कि अपने साथ-साथ हमें परेशान करने के लिए अन्य कई तरह की समस्याएं भी ले आती है। इन समस्याओं में...

ए.आर. रहमान की पहली फिल्म ले मस्क का कान एक्सआर में होगा प्रीमियर

ग्रैमी विजेता भारतीय संगीतकार ए.आर. रहमान की पहली फीचर फिल्म ले मस्क का कान फिल्म मार्केट के कान एक्सआर प्रोग्राम में वल्र्ड प्रीमियर होगा।...

मौद्रिक उपाय पर सवाल

भारतीय रिजर्व बैंक ने बढ़ती मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मौद्रिक उपाय का सहारा लिया है। पहले कदम के तौर पर उसने ब्याज...

चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं पर भड़के यशपाल आर्य, बोले सिस्टम के नाकारापन के कारण पूरे देश में उत्तराखंड की छवि हो रही खराब

हल्द्वानी। चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर सवाल उठाए। कहा कि सरकार यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक...

देहरादून पहुंचा पहाड़ का रसीला खट्टा मीठा फल काफल, जानिए इसके फायदे

देहरादून। सीजन के अंतिम दिनों में ही सही पहाड़ का रसीला काफल देहरादून पहुंच गया है। यह पहाड़ी फल कैंसर समेत कई बीमारियों की रोकथाम...

फर्जी राशन कार्ड धारकों के ख़िलाफ़ खाद्य विभाग की महिमा, “अपात्र को ना और पात्र को हां”, 1967 टोल फ्री नंबर पर करें शिकायत

देहरादून। खाद नागरिक आपूर्ती व उपभोगता मामले मंत्री रेखा आर्या ने आज बनबसा से वर्चुअल माध्यम से खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में...

Recent Comments