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देश में खत्म हुआ तिरंगा अभियान, जानें झंडे को सम्मान के साथ रखने का तरीका, इन गलतियों से होता है अपमान

नई दिल्ली। देश में हर घर तिरंगा अभियान खत्म हो चुका है। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के मौके पर पूरे देशभर में लोगों ने अपने घर पर झंडा लगाया था। पिछले 4 दिनों में आम आदमी से लेकर खास लोगों ने तिरंगा अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। और केवल हर घर तिरंगा वेबसाइट पर 5 करोड़ से अधिक लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज की सेल्फी लेकर पोस्ट की है।

अब चूंकि यह अभियान खत्म हो गया तो झंडे को उतारने का भी समय आ गया है। जिस तरह राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के नियम हैं, उसी तरह उसे उतारकर सम्मान के साथ रखने के भी नियम है। दरअसल, जिस तरह से झंडा रोहण करने के कई नियम होते हैं, उसी तरह अब झंडे को रखने और उतारने के भी कई नियम हैं। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कि आपको अपने घर पर लगे झंडे को किस तरह उतारना चाहिए और किस तरह से इसे रखना चाहिए। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान के साथ रखने का तरीका क्या है। आजादी के जश्न के बाद अब जिम्मेदारी है कि लोग राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें और तिरंगे को फिर से ससम्मान रखा जाए।

2002 में मिला अपनी मर्जी से किसी भी दिन झंडा फहराने का अधिकार
तिरंगे के इतिहास में 26 जनवरी, 2002 का एक खास स्थान है। यही वह दिन है जब भारत के आम नागरिकों को भी अपनी मर्जी से किसी भी दिन झंडा फहराने का अधिकार मिला। इसके पहले झंडा फहराने का अधिकार तो था लेकिन सिर्फ कुछ खास अवसर, जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराया जा सकता है। 26 जनवरी, 2002 से भारतीय झंडा संहिता में संशोधन के बाद ,आम नागरिकों को कहीं भी कभी भी राष्ट्रीय झंडा फहराने का मौका मिला। इसके बाद से आम आदमी अपने घरों, कार्यालयों और फैक्ट्रियों में किसी भी दिन तिरंगा फहरा सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें झंडे का पूरी तरह से सम्मान कायम रखना होगा और तय मानकों के आधार पर झंडे को फहराना होगा।

जानिए तिरंगे को रखने का नियम
हर घर तिरंगा अभियान ने हर व्यक्ति को मौका दिया कि वे अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सके। लेकिन, ध्वज को फहराते वक्त जितना सम्मान दिया जाता है, उतना ही उतारते वक्त भी दिया जाना चाहिए। तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारना चाहिए और उसके बाद उसे समेट कर सुरक्षित जगह रखा जाता है। तिरंगे को समेटने का भी स्पष्ट नियम है। सबसे पहले तिरंगे को दो व्यक्ति पकड़ेंगे। उसके बाद सबसे पहले हरे रंग वाली पट्टी को मोड़ा जाएगा। फिर केसरिया रंग की पट्टी को हरे रंग की पट्टी पर समेटने के बाद दोनों व्यक्ति अपनी-अपनी ओर तिरंगे को फोल्ड करेंगे। ऐसा करने पर अशोक चक्र उपर की ओर आ जाता है। इस तरह से तिरंगे को समेटना चाहिए। इसके अलाव कई संगठन झंडा वापस लेने की मुहिम चला रहे हैं तो अगर आप ऐसा करना चाहें तो उन्हें भी दे सकते हैं।

यदि तिरंगा फट जाता है तो क्या करें
तिरंगे का सम्मान सभी को करना चाहिए। लेकिन, यदि तिरंगा फट जाता है तो उसका निस्तारण करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि तिरंगा फट जाता है तो उसको एक लकड़ी के बॉक्स में पैक किया जाता है। इसके बाद तिरंगे को दफनाया जा सकता है या फिर अग्नि के हवाले किया जाता है। दोनों ही स्थिति बिल्कुल शांत जगह पर करनी चाहिए। साथ ही दफनाने या अग्नि क्रिया करने के बाद मौन रखा जाना अति आवश्यक होता है। इसे कचरादान या फिर अन्य जगहों पर ना फेकें। अगर आपको लगता है कि आपका झंडा सही है और इसे दोबारा फहराया जा सकता है तो इसे अपने पास समेट कर रख लें।

तीन साल की सजा का प्राबधान
तिरंगे झंडे को उतारने के बाद समेट कर सुरक्षित स्थान पर रख दें। ये आपकी जिम्मेदारी है कि आपके घर में या आस-पास झंडे का अपमान ना हो। अगर कोई झंडे का अपमान करते हुए उसका दुरुपयोग करते हुए पाया जाता है तो तीन साल तक की जेल हो सकती है। तिरंगे को लेकर कड़े कानूनी प्रावधान हैं। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का यदि सम्मान नहीं किया जाता है तो यह दंडनीय अपराध है। भारतीय कानून में ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इसलिए हम सभी का कर्तव्य है कि राष्ट्रध्वज का पूरा सम्मान करें।

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