स्वास्थय

पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए इन मुद्राओं का करें अभ्यास, जल्द मिलेगा आराम

पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को पेट में दर्द का सामना करना पड़ता है और इससे राहत के लिए वे अक्सर दर्द निवारक दवाइयों का सहारा लेती हैं। हालांकि, ये दवाइयां उनकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए महिलाएं कुछ योग मुद्राओं का अभ्यास करके भी पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द और ऐंठन से राहत पा सकती हैं। चलिए ऐसे ही कुछ मुद्राओं के अभ्यास का तरीका जानते हैं।

सूर्य मुद्रा
सूर्य मुद्रा के अभ्यास के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद अपने दोनों हाथों को सीधा करके अपने घुटनों पर रखें। इस दौरान आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। अब अपने दोनों हाथों के अंगूठों को अनामिका उंगलियों (रिंग फिंगर) के ऊपर रखें। बाकी सभी उंगलियां सीधी रखें। अंत में अपनी दोनों आंखों को बंद करें और अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें। 15 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

योनि मुद्रा
सबसे पहले योगा मैट पर सुखासन की मुद्रा में बैठें। अब सामान्य रूप से सांस लेते हुए दोनों हाथों की कनिष्ठा उंगली, अनामिका उंगली और मध्यमिका उंगली को मोडक़र आपस मे मिलाएं। इसके बाद दोनों हाथों की तर्जनी उंगली और अंगूठे को ऊपरी हिस्से की तरफ से आपस में मिलाएं। ध्यान रहें कि इन्हें मोडऩा नहीं है, फिर अपनी दोनों आंखों को बंद करें और अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें। 30 से 45 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

शक्ति मुद्रा
शक्ति मुद्रा करने के लिए पहले सुखासन की मुद्रा में बैठें, फिर अपने दोनों हाथों के अंगूठों को अपनी हथेली पर रखें और मुठी बांध लें। अब अपनी दोनों हाथों की अनामिका और कनिष्ठा उंगलियों को सीधा करके आपस में मिलाएं। इस दौरान दोनों हाथों की तर्जनी और मध्यमा उंगलियों से अपने अंगूठों को दबाकर रखें। इस मुद्रा में सामान्य रूप से सांस लेते रहें और अपनी आंखें बंद रखें। कुछ मिनट अभ्यानस के बाद इसका अभ्यास छोड़ दें।

अपान वायु मुद्रा
सबसे पहले सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब अपने हाथों को सीधा करके घुटनों पर रखें। इस दौरान आपकी हथेलियां आसमान की ओर होनी चाहिए। इसके बाद अपने हाथों की तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) को मोड़ते हुए अंगूठे की जड़ से सटाएं। फिर अनामिका (रिंग फिंगर) और मध्यमा उंगली को मोडक़र अंगूठे की नोक को दबाएं। इस दौरान छोटी उंगली बाहर की ओर फैली हुई और दोनों आंखें बंद रखें। कुछ देर बाद इस मुद्रा को छोड़ दें।

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