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काबुल में नहीं उगा सूरज! ब्लैकआउट के बीच तालिबान और अफगान सुरक्षा बलों में जबरदस्त संघर्ष

काबुल। अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार पर संकट गहराता जा रहा है। तालिबानी उग्रवादी काबुल के नजदीक पहुंच गए हैं और राजधानी में पूरी ब्लैकआउट हो गया है। खबरों के मुताबिक तालिबान ने विस्फोटकों का इस्तेमाल करते हुए बिजली सप्लाई को ध्वस्त कर दिया है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि काबुल अंधेरे में डूबा है और तालिबान के साथ संघर्ष अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।

इससे अफगानिस्तान के एक सांसद और तालिबान ने कहा है कि चरमपंथियों ने जलालाबाद पर कब्जा कर लिया है और काबुल देश के पूर्वी हिस्से से कट गया है। तालिबान ने रविवार सुबह कुछ तस्वीरें ऑनलाइन जारी कीं, जिनमें उसके लोगों को नांगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद में गवर्नर के दफ्तर में देखा जा सकता है। प्रांत के सांसद अबरारुल्ला मुराद ने एसोसिएटिड प्रेस को बताया कि चरमपंथियों ने जलालाबाद पर कब्जा कर लिया है।

मजार ए शरीफ पर तालिबान का कब्जा
इससे पहले अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर शनिवार को चौतरफा हमलों के बाद तालिबान का कब्जा हो गया। एक सांसद ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही, तालिबान का पूरे उत्तरी अफगानिस्तान पर कब्जा हो गया और अब सिर्फ मध्य और पूर्वी हिस्से ही पश्चिमी देश समर्थित सरकार के नियंत्रण में रह गये हैं। बल्ख के सांसद अबास इब्राहिमज़ादा ने कहा कि प्रांत की राष्ट्रीय सेना के कोर ने पहले आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद सरकार समर्थक मिलिशिया और अन्य बलों ने मनोबल खो दिया और हार मान ली।

उन्होंने कहा कि हजारों लड़ाकों का नेतृत्व करने वाले अब्दुल राशिद और अता मोहम्मद नूर प्रांत से भाग गये हैं और उनका कोई अता-पता नहीं है। अफगानिस्तान के एक सांसद ने कहा कि तालिबान ने बिना लड़ाई के मध्य दाइकुंदी प्रांत पर कब्जा कर लिया है। प्रांतीय सांसद सैयद मोहम्मद दाऊद नसीरी ने कहा कि राजधानी निली में सभी प्रांतीय प्रतिष्ठानों पर विद्रोहियों का कब्जा होने से पहले केवल दो बार गोलीबारी की आवाज सुनी गई।

हेरात, कंधार और मैमाना पर भी कब्जा
तालिबान हाल के दिनों में बहुत आगे बढ़ा है। उसने हेरात और कंधार पर कब्जा कर लिया, जो देश के क्रमश: दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर हैं। उसका अब 34 प्रांतों में करीब 24 पर कब्जा है। तालिबान ने पाकिस्तान की सीमा से लगे छोटे से प्रांत कुनार पर बिना किसी लड़ाई के कब्जा कर लिया। क्षेत्र के एक सांसद नेमतुल्लाह करयब ने यह जानकारी दी। बाद में लड़ाकों ने बगैर लड़ाई के ही लगमान प्रांत की राजधानी मिहतेरलम पर कब्जा कर लिया। प्रांत के सांसद जेफोन सफी ने यह जानकारी दी।

तालिबान ने उत्तरी फरयाब प्रांत की राजधानी मैमाना पर भी कब्जा कर लिया है। प्रांत की एक सांसद फौजिया रऊफी ने यह जानकारी दी।। मैमाना का तालिबान ने एक महीने से घेरा डाल रखा था और तालिबान आतंकी कुछ दिन पहले शहर में घुसे थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने विरोध किया लेकिन आखिरकार शनिवार को आत्मसमर्पण कर दिया।

अफगानिस्तान में गृह युद्ध का खतरा
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्णतया वापसी में तीन सप्ताह से भी कम समय बचा है और ऐसे में तालिबान ने उत्तर, पश्चिम और दक्षिण अफगानिस्तान के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। इसके कारण यह आशंका बढ़ गई है कि तालिबान फिर से अफगानिस्तान पर कब्जा कर सकता है या देश में गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

इससे पहले, लोगार से सांसद होमा अहमदी ने शनिवार को बताया कि तालिबान ने पूरे लोगार पर कब्जा कर लिया है और प्रांतीय अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। उन्होंने बताया कि तालिबान काबुल के दक्षिण में मात्र 11 किलोमीटर दूर चार असयाब जिले तक पहुंच गया है। बाद में, विद्रोहियों ने काबुल के उत्तर-पूर्व में लगमान प्रांत की राजधानी मिहतरलाम पर बिना किसी लड़ाई के कब्जा कर लिया। प्रांत के एक सांसद ज़ेफ़ोन सफ़ी ने यह जानकारी दी।

आतंकवादियों ने पाकिस्तान की सीमा से लगे पक्तिया की राजधानी पर भी कब्जा कर लिया। यह जानकारी प्रांत से सांसद खालिद असद ने दी। पड़ोसी पक्तिका प्रांत के एक सांसद सैयद हुसैन गरदेजी ने कहा कि तालिबान ने स्थानीय राजधानी गरदेज के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया है, लेकिन सरकारी बलों के साथ लड़ाई जारी है। तालिबान ने कहा कि शहर पर उनका कब्जा हो गया है।

20 वर्षों की “उपलब्धियों” को बेकार नहीं जाने देंगेः गनी
इस बीच, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि वह 20 वर्षों की “उपलब्धियों” को बेकार नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान के हमले के बीच ‘विचार-विमर्श’ जारी है। उन्होंने शनिवार को टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया। हाल के दिनों में तालिबान द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा जमाए जाने के बाद से यह उनकी पहली सार्वजनिक टिप्पणी है।

अमेरिका ने इस हफ्ते कतर में सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता जारी रखी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चेतावनी दी है कि बलपूर्वक स्थापित तालिबान सरकार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गनी ने कहा, ‘‘हमने सरकार के अनुभवी नेताओं, समुदाय के विभिन्न स्तरों के प्रतिनिधियों और हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।’’ उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा, ‘‘जल्द ही आपको इसके परिणाम के बारे में बताया जाएगा।’’

बेकार गए अमेरिका के सैकड़ों अरब डॉलर
विदेशी बलों की वापसी और वर्षों में अमेरिका से मिली सैकड़ों अरब डॉलर की मदद के बावजूद अफगानिस्तान से बलों के पीछे हटने के कारण यह आशंका बढ़ गई है कि तालिबान फिर से देश पर कब्जा कर सकता है या देश में गुटीय संघर्ष छिड़ सकता है, जैसा कि 1989 में वहां से पूर्व सोवियत संघ के जाने के बाद हुआ था। अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से पैर पसारने के बीच अमेरिकी दूतावास को आंशिक रूप से खाली करने में मदद करने के लिए अमेरिका की मरीन बटालियन का 3,000 कर्मियों का दस्ता शुक्रवार को यहां पहुंचा। शेष जवानों के रविवार को पहुंचने की संभावना है।

अपने यहां अफगानों को बसाएगी कनाडा सरकार
इस बीच, कनाडा सरकार ने घोषणा की है कि वह तालिबान आतंकवादियों द्वारा शुरू किए गए घातक हमले के बीच युद्धग्रस्त देश से पलायन कर रहे सिखों और हिंदुओं सहित 20,000 ‘संवेदनशील’ अफगानों को स्थायी रूप से अपने यहां बसाएगी। कनाडा सरकार ने एक बयान में कहा, ”कनाडा अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति और कई कमजोर अफगानों के समक्ष पैदा हुए जोखिम को लेकर बेहद चिंतित है। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के हिस्सों पर कब्जा किये जाने से अफगानों का जीवन खतरे में है। कई लोग पहले ही देश छोड़कर भाग चुके हैं।”

इस बीच, अमेरिकी वायुसेना ने अफगान गठबंधन के समर्थन में कई हवाई हमले किए हैं, लेकिन इससे तालिबान के आगे बढ़ने पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। एक बी-52 बमवर्षक विमान और अन्य युद्धक विमानों ने देश के हवाई क्षेत्र में उड़ानें भरीं। तालिबान ने पिछले सप्ताह में अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अफगानिस्तान की केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। उधर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने वहां मौजूद अपने राजनयिक स्टाफ की मदद के लिए सैनिकों को भेजा है।

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