Home राष्ट्रीय शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी संसदीय बोर्ड से बाहर करना क्या मध्य...

शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी संसदीय बोर्ड से बाहर करना क्या मध्य प्रदेश के लिए है साफ संकेत?

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा की फैसले लेने वाली शीर्ष संस्था भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उनके बाहर निकलने और अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के बीच एक सीधी रेखा खींची जा रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता कांग्रेस के गोविंद सिंह ने कहा, हम सोचते थे कि वह 2023 के बाद केंद्र में चले जाएंगे, लेकिन अब पार्टी उन्हें प्रमुख पदों पर रखने के मूड में नहीं है।
राज्य के भाजपा नेताओं ने कहा है कि उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है। बीजेपी प्रवक्ता दिव्या गुप्ता ने कहा, क्या बीजेपी संसदीय बोर्ड में कोई और मुख्यमंत्री है? नहीं है। अगर कोई अन्य सीएम शामिल होता तो उन्हें चिंता करने की कोई बात होती।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार भ्रष्ट है इसलिए अस्थिर है। कांग्रेस जोर देकर कहती है कि ष्ऊपर से शिवराज चौहान के लिए एक स्पष्ट संकेत है। गोविंद सिंह ने कहा, भाजपा में ऐसे कई नेता हैं जिन्हें लगता है कि वे अब उनकी जगह ले सकते हैं. इंतजार करें और देखें। बुधवार को भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी को संसदीय बोर्ड से हटा दिया। चौहान का पार्टी के संसदीय बोर्ड से निकाला जाना अप्रत्याशित था।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बड़ा ओबीसी चेहरा हैं और अनुभवी हैं। चौहान ने इस साल मार्च में बतौर मुख्यमंत्री 15 साल पूरे किए हैं। बीजेपी शासित राज्यों में पार्टी में बतौर राज्य के मुखिया यह रिकॉर्ड है। शिवराज को अगस्त 2013 में नरेंद्र मोदी के साथ संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था। उस वक्त चौहान को अक्सर मोदी के बरक्स खड़ा किया जाता था। सन 2012 में बीजेपी की एक बैठक के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने शिवराज सिंह चौहान के काम की प्रशंसा की थी। इसे मोदी के महत्व को कम करने के प्रयास के रूप में देखा गया।

यह भी इत्तेफाक है कि सन 2005 में जब शिवराज को मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने सत्यनारायण जटिया की जगह ली। इस बार संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति में शिवराज की जगह जटिया सदस्य बने हैं। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड में चौहान नहीं बल्कि थावरचंद गहलोत की जगह आए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के फैसले पर कहा कि, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा नवगठित केंद्रीय संसदीय बोर्ड अनुभव से भरा है। मैं उन्हें बधाई देता हूं।

सत्यनारायण जटिया ने कहा, यह नया नहीं है, यह पार्टी में रोटेशन है। उन्होंने अपनी सेवाएं देकर पार्टी को लाभान्वित किया है। मैं उनके काम और उनके योगदान की भी सराहना करता हूं। उन्हें कहीं और इस्तेमाल किया जाएगा। पार्टी का काम नहीं रुकता, कार्यकर्ता बिना काम के नहीं रहता।

विपक्ष को लगता है कि शिवराज अपना कद खो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि, हम तो आज प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हैं। कम से कम भ्रष्टाचार के समाचार दिल्ली पहुंच रहे हैं तो उनको संसदीय कार्य बोर्ड और चुनाव समिति से हटा दिया। अभी भी शिवराज जी को कहते हैं, सुधर जाओ, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले मुख्यमंत्री को हटाया है। मैं चाहूंगा तत्काल उनको आग्रह सचेत कर दें और कार्रवाई करने के लिए तैयार रहें।

भाजपा की प्रवक्ता डॉ दिव्या गुप्ता ने कहा कि, संसदीय समिति में जो लोग लिए गए हैं वे वरिष्ठ हैं। बीजेपी किसी को निकालती नहीं है, लेती है. यह लेने की प्रक्रिया है। 2024 से पहले सारा तंत्र रिवाइज होना जरूरी है। कहीं कोई और मुख्यमंत्री हो, शिवराज जी नहीं हों, तो आप प्रश्न करें तो बेहतर. जब कोई नहीं है, तो बिल्कुल ये चिंता का विषय नहीं है।

भाजपा सांसद गणेश सिंह का कहना है कि,यह कोई चिंता का विषय नहीं है. पार्टी अलग-अलग वक्त पर अलग दायित्व सबको देती है। मेरे ख्याल से उनका पूरा समय मध्यप्रदेश में लगे, इस विचार से फैसला लिया होगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया संघ के करीबी हैं। वे सात दफे सांसद रहे हैं। उनके सहारे बीजेपी ने दलित कार्ड भी चला है। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं. वे 84 सीटों पर हार जीत तय कर सकते हैं। राज्य में अनुसूचित जाति के लगभग 17 फीसदी वोट हैं। साल 2013 में बीजेपी ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित 82 सीटों में से सिर्फ 34 जीती थीं जबकि 2013 में यह आंकड़ा 59 था। अपने इस वोट बैंक को हासिल करना बीजेपी की बड़ी प्राथमिकता है। वहीं शिवराज सिंह वर्तमान में एकमात्र बीजेपी सीएम हैं जो मोदी के पीएम बनने से पहले से सत्ता में हैं। बाकी मुख्यमंत्री मोदी और शाह के काल में कुर्सी पर बैठे हैं। एक तरह से राज्य में शिवराज का आधार मोदी और शाह से स्वतंत्र है. लेकिन 2019 में मामूली अंतर से चुनाव में मिली हार ने उनके कद को कुछ कम तो किया ही था।

नए निजाम में शिवराज समीकरण थोड़ा मुश्किल तो है। शिवराज ऐसे नेता हैं जिनकी छवि उदारवादी रही है लेकिन जानकार मानते हैं कि नई बीजेपी में वैधता हासिल करने के लिए वे अपने मौजूदा कार्यकाल में ज्यादा कट्टर हिंदुत्व की छवि का आवरण ओढ़ रहे हैं।

RELATED ARTICLES

यह है नरेंद्र मोदी का नया भारत, जहां महिलाओं को मिलता है उनका हक और सम्मान- कंगना रनौत 

मनाली के माल रोड पर भाजपा प्रत्याशी कंगना रनौत का किया गया भव्य स्वागत  अभिनेत्री ने अपने पहनावे से जीता जनता का दिल   हिमाचल।  प्रदेश के...

सीएम योगी ने भाजपा उम्मीदवार डॉ. जितेंद्र सिंह के पक्ष में किया चुनाव प्रचार 

कांग्रेस ने हमारे आराध्यों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देशवासियों को किया निराश - सीएम योगी कठुआ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कठुआ में...

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को मिली ‘Z’ कैटगरी की सुरक्षा

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को ‘Z’ कैटगरी की सुरक्षा दी गई है।  IB से मिले इनपुट के आधार पर गृह मंत्रालय...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी के उत्तराखण्ड दौरे से गर्माएगा चुनावी माहौल

प्रियंका गांधी 13 अप्रैल को रामनगर व रुड़की में करेंगी चुनावी जनसभा देहरादून। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी 13 अप्रैल को रामनगर...

भाजपा ने मोदी को फिर पीएम बनाने और विकसित भारत के अलाप को दी गति

2019 के हार के अंतर को कम करने में जुटी कांग्रेस का उलटफेर का भी दावा भाजपा के चुनावी मुद्दे के केंद्र में पीएम मोदी...

आईपीएल 2024- लखनऊ सुपर जाएंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच मुकाबला आज 

नई दिल्ली।  आईपीएल 2024 के 26वें मैच में आज लखनऊ सुपर जाएंट्स का सामना दिल्ली कैपिटल्स से है। मौजूदा अंक तालिका में जहां लखनऊ...

मुख्यमंत्री ने भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा को जिताने की अपील की

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है- मुख्यमंत्री राज्य सरकार विकास के लिए समर्पित है और आगे भी समर्पित रहेगी- मुख्यमंत्री कांग्रेस...

जूनियर एनटीआर की ‘देवरा’ की रिलीज तारीख टली, अब 10 अक्टबूर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म

दर्शक जूनियर एनटीआर की आने वाली फिल्म देवरा का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।इस फिल्म में जूनियर की जोड़ी अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के...

यह है नरेंद्र मोदी का नया भारत, जहां महिलाओं को मिलता है उनका हक और सम्मान- कंगना रनौत 

मनाली के माल रोड पर भाजपा प्रत्याशी कंगना रनौत का किया गया भव्य स्वागत  अभिनेत्री ने अपने पहनावे से जीता जनता का दिल   हिमाचल।  प्रदेश के...

कोलकाता में बोली ममता बनर्जी – बंगाल में एनआरसी और सीएए नहीं होने दूंगी लागू 

मैं देश के लिए अपना खून देने को हूं तैयार- ममता बनर्जी मुझे सर्वधर्म समभाव चाहिए, नो एनआरसी, नो सीएए- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  कोलकाता। पश्चिम...

उत्तराखंड आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे राहुल गांधी- बीजेपी 

देहरादून। भाजपा ने नेताओं के दौरे को बाधित करने के कांग्रेसी आरोपों को सिरे खारिज करते हुए , हार की बहानेबाजी करार दिया है...

मौसमी बुखार से सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये असरदार टिप्स

सर्दियों से गर्मियां आने पर मौसमी बुखार का खतरा काफी बढ़ जाता है क्योंकि गर्मी और आर्द्रता में तेजी से वायरस हमला करते हैं।इसका...

पीएम मोदी के अब यह दो दिग्गज उत्तराखंड में गरमाएंगे प्रचार का माहौल 

आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गौचर, लोहाघाट और काशीपुर में करेंगे रैली  रविवार को सीएम योगी पहुंचेंगे देहरादून  देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रक्षामंत्री...

Recent Comments