Home ब्लॉग सुधार और आधार

सुधार और आधार

कई चुनाव सुधार के प्रावधान वाले चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक को विपक्षी हंगामे के बीच संसद के दोनों सदनों से पारित करा दिया गया। इस विधेयक के संबंध में सरकार की दलील है कि इससे फर्जी मतदान पर रोक लगेगी और चुनावी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करेगा। दरअसल, इन सुधारों में मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोडऩा भी शामिल है। वहीं विपक्ष की मांग थी कि विधेयक को स्थायी समिति को भेजा जाये। यही वजह है कि चुनाव सुधारों के प्रति एकमत होते हुए भी विपक्ष सुधारों के तरीकों व साधनों को लेकर असहमति जताता रहा है। वहीं सरकार का तर्क है कि सुधार के जरिये मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जायेगा और सुनिश्चित किया जा सकेगा कि एक व्यक्ति एक ही निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सके।

विपक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कानून मंत्री किरण रिजिजू का कहना कि मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोडऩा अनिवार्य नहीं है। आधार कार्ड की जानकारी न देने पर भी मतदाता सूची में नाम शामिल करने के किसी भी आवेदन को अस्वीकार नहीं किया जायेगा। लेकिन मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को संतोषजनक ढंग से बताना होगा कि वह आधार से जुड़ा विवरण देने में क्यों असमर्थ है। ऐसे लोगों को वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की छूट होगी। उल्लेखनीय है कि बॉयोमीट्रिक डेटा को वोटर आईडी कार्ड से जोडऩे की एक परियोजना मार्च, 2015 में चुनाव आयोग द्वारा फर्जी व दोहरे मतदाताओं की पहचान करके उन्हें हटाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को रोक दिया था। दरअसल, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में से काट दिये गये थे, जिसमें से कुछ गलती से भी काटे गये थे। बताया जाता है कि ये नाम घर-घर सत्यापन अनिवार्य किये बिना हटाये गये थे। ऐसे में जरूरी है कि मतदाता की निजता का ख्याल रखते हुए योजना को दोषमुक्त बनाया जाये।

वहीं विपक्ष की दलील है कि सरकार का यह सुधार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध है। इससे मतदाताओं के डेटा के दुरुपयोग के मामले बढ़ सकते हैं क्योंकि देश में पुख्ता डेटा सुरक्षा कानून नहीं है। वे सरकार द्वारा जल्दबाजी में विधेयक पेश किये जाने पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं सरकार की दलील है कि कार्मिक, विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति की संस्तुति थी कि मतदाता सूची की शुचिता को बरकरार रखा जाये, जिसके चलते मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बाबत चुनाव आयोग और कानून मंत्रालय ने कई दौर की बैठकों के जरिये इस मुद्दे पर व्यापक विमर्श किया। सरकार का कहना है कि सुधारों के जरिये चुनावी कानून लिंगभेद मुक्त होगा और अब युवा साल में चार बार मतदाता सूची के लिये नामांकन करा सकेंगे। लेकिन विपक्ष बार-बार हड़बड़ी में सुधार कानून लाने और इसके प्रावधानों पर व्यापक विचार-विमर्श का मौका न देने का आरोप लगा रहा है। यही वजह है कि राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बीच विधेयक को पारित किया गया। इस चुनाव सुधार जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर विपक्ष में अविश्वास को अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। सरकार को सभी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए था।

वहीं संसदीय लोकतंत्र में सरकार को असहमति का भी सम्मान करना चाहिए। दूसरी ओर यह भी विडंबना ही है कि जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तो भी हम यदि मतदाता सूची को पारदर्शी व विश्वसनीय नहीं बना पाये तो यह तंत्र की विफलता का ही परिचायक है। जिसको लेकर दलील दी जाती रही है भारतीय लोकतंत्र मतदाता पहचान पत्र को लेकर सहिष्णु रहा है, जिसके चलते लोग आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र से जोडऩे को लेकर संकोच करते रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद फर्जी मतदान को रोककर चुनावी प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाना वक्त की जरूरत है। वहीं निजता की गोपनीयता बनाये रखना भी जरूरी है क्योंकि आधार कार्ड हमारे फोन के साथ जुड़ा होता है।

RELATED ARTICLES

बिना नक्शे-कैलेंडर के भागता वक्त

शमीम शर्मा आज मेरे ज़हन में उस नौजवान की छवि उभर रही है जो सडक़ किनारे नक्शे और कैलेंडरों के बंडल लिये बैठा रहा करता।...

मौसम की तल्खी

कहते हैं आमतौर पर मुंबई में लोग दिसंबर के महीने में पसीना पोंछते नजर आते थे, लेकिन इस बार मौसम ने ऐसी करवट ली...

श्री विहीन लंका

महंगाई के चरम और खाली होते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच श्रीलंका की हालात इतनी खराब हो गई है कि उसके पास आज विदेशी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

खुद का नहीं तो पत्नी को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे विधायक कर्णवाल : डाला दिल्ली में डेरा

रुड़की। झबरेड़ा से टिकट बचाने के लिए भाजपा के सीटिंग विधायक देशराज कर्णवाल ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। पार्टी ने उन्हें भगवानपुर...

 नही थम रहा कोरोना का कहर, 3295 नए मामलों के साथ ही आज 04 मरीजो की हुई मौत

देहरादून। उत्तराखंड में वैश्विक महामारी कोविड-19 का कहर जारी है ,आज राज्य के सभी 13 जनपदों में कोरोना वायरस के 3295 नये मामले सामने आए...

त्रिवेंद्र सिंह रावत से भिड़ने वाली शिक्षिका ने थामा यूकेडी का दामन 

अर्जुन सिंह इंडिया टाइम्स: रविवार को उत्तराखंड क्रांति दल संसदीय बोर्ड अध्यक्ष के नेतृत्व में उतरा पन्त बहुगुणा ने दल का दामन थामने पर...

प्रेशर पॉलिटिक्स के महारथी अब खुद हुए अंडर प्रेशर

देहरादून। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के भाजपा से 6 साल के लिए बर्खास्त होने के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा...

उत्तराखंड में भाजपा ने दिया कांग्रेस को बड़ा झटका, महिला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य भाजपा में हुई शामिल

उत्तराखंड के राजनीतिक की बड़ी खबर, देहरादून: उत्तराखंड महिला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य पहुंची बीजेपी प्रदेश कार्यालय में, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने...

जॉगिंग की शुरूआत करने वाले हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

जॉगिंग एक तरह की एक्सरसाइज है, जिसमें व्यक्ति को धीमी गति में दौडऩा होता है। इस एक्सरसाइज को रोजाना करने से आपको कई तरह...

एकता कपूर के शो नागिन 6 में तेजस्वी प्रकाश को लाने की तैयारी

बिग बॉस 15 में एंट्री करने के बाद अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है। उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा...

बिना नक्शे-कैलेंडर के भागता वक्त

शमीम शर्मा आज मेरे ज़हन में उस नौजवान की छवि उभर रही है जो सडक़ किनारे नक्शे और कैलेंडरों के बंडल लिये बैठा रहा करता।...

उत्तराखंड बीजेपी ने उठाया सख्त कदम, हरक सिंह रावत को मंत्रिमंडल समेत बीजेपी से किया 6 साल के लिये निष्कासित

देहरादून । भाजपा ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही हरक...

85 नए केस के साथ 93 हुआ उत्तराखंड में ओमिक्रॉन संक्रमितों को आंकड़ा

देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट तेजी से फैल रहा है। रविवार को आई 159 सैंपलों की जीनोम सीक्वेसिंग रिपोर्ट में से 54...

Recent Comments