उत्तराखंड

सीएम नहीं खुद को मुख्य सेवक बताकर ​जीता लोगों का दिल, बातें कम-काम ज्यादा पर रखा अपना फ़ोकस

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का हर कोई मुरीद हो रखा है। आलाकमान से लेकर आम जनता तक को उनके फैसले खूब भा रहे हैं। बीजेपी शासन के साढ़े 4 साल में तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर 4 जुलाई को पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ली। शपथ लेने के बाद से पुष्कर सिंह धामी ने खुद को जनता का मुख्य सेवक बनकर सेवा करने की बात की। इससे धामी जनता के बीच में मुख्यमंत्री आवास तक आम लोगों की पहुंच को उन्होंने सरल कर दिया। जिससे लोगों में नई उम्मीद जगी है। इतना ही नहीं सीएम हर कार्यक्रम में हल्के फुल्के माहौल और हंसी के जरिए भी लोगों के दिल में जल्दी जगह बनाने में कामयाब हुए।

युवा सीएम के तौर पर धामी ने अपनी छवि के अनुरूप ही फैसले लेने शुरु किये। सबसे पहले युवाओं के लिए रोजगार देने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सीएम ने 22 हजार पदों पर नियुक्ति देने का ऐलान किया। इसके बाद कोविड में अपनों को खो चुके बच्चों के लिए सीएम ने वात्सल्य योजना लाकर धामी ने ऐसे असहाय बच्चों को सहारा और सुरक्षा देने का सरकार ने काम किया है। युवाओं के बीच सीएम की छवि पुराने मुख्यमंत्रियों की तुलना में बिल्कुल अलग है।

धामी को 6 माह की पारी खेलने का मौका मिला है। ऐसे में 6 माह में धामी को बीजेपी सरकार के साढ़े 4 साल की छवि जिसमें पूर्ववर्ती सरकार के लिए गए विवादित फैसलों को लेकर भी जनता के सामने इमेज बदलने की चुनौती है। इसके साथ ही 6 माह में अपनी सरकार के कार्यों को धरातल पर उतारने का टारेगट है। धामी ने 2 माह में न तो पूर्ववर्ती सरकार के किसी फैसले को बदला है और नहीं उनकी ​जुबान फिसली है।

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