उत्तराखंड

गुंजी गांव ने रचा इतिहास — देश की पहली रंग महिला आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल बनीं निर्विरोध ग्राम प्रधान

आशीष ध्यानी

गुंजी (उत्तराखंड)।

सीमांत गांव गुंजी ने लोकतंत्र की परिपक्वता और एकता का एक अनूठा उदाहरण पेश करते हुए देश की पहली रंग महिला आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल को सर्वसम्मति से ग्राम प्रधान चुना है। यह निर्णय न केवल गांव के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए महिला नेतृत्व और सुशासन की एक मिसाल बनकर सामने आया है।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी विमला गुंज्याल, जिन्होंने उत्तराखंड पुलिस विभाग में उच्च पदों पर रहते हुए ईमानदारी, निष्पक्षता, और सेवा भावना से कार्य किया, अब अपनी जन्मभूमि के विकास की कमान संभालेंगी। यह निर्णय तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब ग्रामवासियों ने आपसी मतभेद भुलाकर, सामूहिक सहमति से उन्हें नेतृत्व सौंपा है।

गांव के लोग मानते हैं कि उनकी प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, भ्रष्टाचार मुक्त कार्य संस्कृति, और संसाधनों तक सीधी पहुँच के चलते गुंजी को अब योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में बड़ी मदद मिलेगी। गांव के बुनियादी ढांचे जैसे – भूमि अधिकार, पानी, बिजली, सीवरेज व्यवस्था और पर्यटन आधारित रोजगार जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति की उम्मीद है।

चुनाव नहीं, सहमति का संकल्प
गांव के विकास को सर्वोपरि रखते हुए इस बार पंचायत चुनाव में वह हुआ जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। सभी संभावित प्रत्याशियों अर्चना, किरण, लक्ष्मी, उमी और हीरा ने ग्रामहित में अपने नाम वापस लेकर सर्वसम्मति से विमला गुंज्याल को समर्थन दिया। यह निर्णय गांव की परिपक्व सोच और सामूहिक जागरूकता को दर्शाता है।

‘वाइब्रेंट विलेज’ की ओर मजबूत कदम
भारत सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत सीमांत क्षेत्रों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। विमला गुंज्याल जैसी अनुभवी और निष्ठावान महिला अधिकारी का निर्विरोध ग्राम प्रधान बनना इस योजना को जमीन पर उतारने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। उनके प्रशासनिक अनुभव, नीति निर्धारण की समझ और पारदर्शी कार्यशैली गांव को एक आदर्श पंचायत में बदल सकती है।

महिला नेतृत्व की नई पहचान
यह निर्णय महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम है। विमला गुंज्याल न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता के लिए जानी जाती हैं, बल्कि अपने दृढ़ चरित्र, समावेशी सोच, और जनहित को प्राथमिकता देने की भावना से भी लोगों के बीच आदर प्राप्त करती रही हैं।

समाज की एकजुटता को सलाम
इस ऐतिहासिक निर्णय को संभव बनाने वाले सभी ग्रामवासियों व पूर्व प्रत्याशियों को भी साधुवाद दिया जा रहा है। “महिला नेतृत्व समाज में समग्र विकास को गति देता है,” यह बात गुंजी गांव ने साबित कर दी है।

गुंजी अब सिर्फ सीमांत नहीं, बल्कि नेतृत्व, सोच और समरसता के मामले में अग्रणी गांव बनकर उभरा है, जो आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनेगा।

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