उत्तराखंड

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा 50 साल तक दोस्त-साथी बिपिन रावत का जाना असहनीय क्षति

जम्मू-कश्मीर में ब्रिगेड कमांडर के रूप में दोनों ने किया था साथ काम

देहरादून। जनरल बिपिन रावत, हमारे गौरव, देश के पहले सीडीएस। 50 साल तक दोस्त और साथी, एनडीए स्क्वैड्रन साथी का जाना, असहनीय क्षति। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने बुधवार को सीडीएस जनरल बिपिन रावत के दुर्घटना में असामयिक निधन पर अपनी पीड़ा कुछ इस तरह व्यक्त की। इंटरनेट मीडिया पर संक्षिप्त लेकिन भावपूर्ण पोस्ट में उन्होंने जनरल बिपिन रावत के साथ अपने कार्यकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ब्रिगेड कमांडर के रूप में उन्होंने साथ काम किया। कई पेशेवर काम भी दोनों ने साथ अंजाम दिए। उनका निधन बहुत बड़ा नुकसान है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बीती नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के साथ मुलाकात का जिक्र भी किया। जनरल रावत राज्यपाल के निमंत्रण पर राज्य स्थापना दिवस के मौके पर राजभवन पहुंचे थे। राज्यपाल ने कहा कि पेशेवर जीवन में दोनों के बीच कई सुंदर स्मृतियां रही हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही दोनों ने उनका स्मरण किया था। जनरल रावत को उत्तराखंड के पौड़ी जिले का माटी पुत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका निधन असहनीय क्षति है। राज्यपाल ने दुर्घटना में मारे गए अन्य सैन्य अधिकारियों व कार्मिकों के निधन को त्रासदी करार दिया। उन्होंने दुर्घटना में घायल ग्रुप कैप्टन वरुण के जीवन की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

संतों ने दी मृतकों को श्रद्धांजलि
तमिलनाडु में हुए हेलीकाप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत और पत्नी मधुलिका रावत सहित सैन्य अधिकारियों की मौत पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शोक जताया है। हरिद्वार के संतों ने भी अपनी शोक संवेदना जताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा) ने कहा कि जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड की शान और मां भारती के सच्चे सपूत थे। उनके नेतृत्व में देश की सेना ने चीन और पाकिस्तान के सैनिकों को सीमाओं से पीछे धकेल कर रखा। उन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है। उनका निधन देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। श्रीमहंत रोवद्र पुरी महाराज ने कहा कि यह हादसा पूरे देश के लिए दुखद है। जनरल रावत में अदभुत नेतृत्व क्षमता थी।

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