राष्ट्रीय

लॉकडाउन का असर: वर्क फ्रॉम होम में काम के दबाव से उलझ रही रिश्तों की डोर

कोरोना लॉकडाउन में करीब डेढ़ साल से वर्क फ्रॉम होम के जरिये दफ्तर का दबाव घर पहुंचकर रिश्तों की दीवार में दरारें डालने लगा है। ऐसे घर जहां पति-पत्नी में से एक ही काम करता है वहां रिश्तों की डोर अधिक उलझ रही है। इससे जीवनसाथी और बच्चों के साथ संबंधों में चिड़चिड़ापन आ रहा है। नतीजतन भावनात्मक सलाह लेने वालों में पुरुषों की संख्या बढ़ रही है।

पुणे में लॉकडाउन के दौरान घरेलू विवाद को लेकर महिलाओं, बच्चों व वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती शिकायतें सुलझाने के लिए खुले ‘भरोसा सेल’ के मुताबिक पिछले साल जहां महिलाओं की शिकायतें अधिक थीं दूसरी लहर में पुरुषों की शिकायतें बढ़ी हैं। उनके काम के तनाव में जीवनसाथी की उनसे मदद की उम्मीद उनके रिश्तों को बिगाड़ रही है। ऐसे में उनके लिए इस तनाव से बाहर आना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्क फ्रॉम होम में अमूमन काम के घंटे बढ़ जाते हैं। इसके  अलावा ऑफिस की तरह सीटिंग नहीं होना या आरामदायक उपयुक्त फर्नीचर नहीं होने से शारीरिक जटिलताएं आती हैं। इन सब के बीच जब जीवनसाथी के साथ एक दूसरे को समझने में चूक होती है तो रिश्तों में इसका असर होता है।

पुरुषों की दलील, पत्नी काम का दबाव नहीं समझती
भरोसा सेल में काउंसिलिंग करने वाली वकील प्रार्थना बताती हैं कि पुरुषों की सबसे मुख्य शिकायत यह होती है कि उनकी पत्नी काम के दबाव को समझना ही नहीं चाहती है। उन्हें लगता है कि घर से काम करते वक्त हमें उनकी मदद भी करनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर तनाव की स्थिति बनती है। अधिकतर पुरुषों का मानना है कि उनकी पत्नी को लगता है कि वे कुछ खास काम नहीं करते बस कंप्यूटर के आगे बैठे रहते हैं।

कामकाजी दंपती अधिक समझते हैं काम का तनाव
प्रार्थना के मुताबिक जिन घरों में पति पत्नी दोनों पेशेवर हैं वहां मुश्किलें कम हैं। दोनों जीवनसाथी एक दूजे के काम के तनाव को भलीभांति समझते हैं और इनके बीच आपसी तालमेल भी बैठ जाता है। इससे वर्क फ्रॉम होम में इन्हें अधिक मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। उलटा समय मिलने पर ये एक दूसरे को बेहतर महसूस कराने की भी कोशिश करते हैं।

लॉकडाउन में महिलाएं हुईं थी ज्यादा परेशान 
राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान पिछले साल महिलाओं की कई तरह की शिकायतें आईं थी। इसमें तनाव, मनोवैज्ञानिक मुश्किलें, घरेलू हिंसा, भावनात्मक तनाव समेत कई मुद्दे शामिल थे।

तनाव की इतनी शिकायतें आईं
2074 कुल शिकायतें आईं 2020 में पुणे की भरोसा सेल के पास
1283 इनमें महिलाओं की थीं और 791 पुरुषो की
266 शिकायतें पुरुषों ने कीं 2021 के चार महीनों में

ऐसे दूर करें तनाव 
एक दूसरे को सहानुभूति देने का प्रयास करें
अपने जीवनसाथी की प्रशंसा करें
एक दूसरे के काम की सराहना करें
सामने वाले को महसूस करायें कि उसके सहयोग के बिना आपका काम कर पाना मुश्किल है

Source Link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *