21 दिन की देरी पड़ सकती है भारी! बर्थ सर्टिफिकेट के नियमों में बड़ा बदलाव
देहरादून। अगर आपके घर में नवजात शिशु का जन्म हुआ है या भविष्य में होने वाला है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जन्म के बाद सबसे जरूरी दस्तावेज माने जाने वाले जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को लेकर केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर चुकी है। लोकसभा से 31 जुलाई 2026 को पारित जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त हो जाएगी।
अब तक लोग वर्षों बाद भी मामूली औपचारिकताओं के साथ जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेते थे, लेकिन नए प्रावधान लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा। देरी होने पर प्रशासनिक मंजूरी से लेकर न्यायिक आदेश तक की आवश्यकता पड़ सकती है। इसका सीधा असर लाखों परिवारों पर पड़ेगा, क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र अब केवल स्कूल में प्रवेश का दस्तावेज नहीं रहेगा, बल्कि जीवनभर की सरकारी पहचान का आधार बनेगा।
क्यों बदले जा रहे हैं नियम?
केंद्र सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाना है। इसी उद्देश्य से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया गया है।
सरकार का मानना है कि समय पर पंजीकरण होने से भविष्य में पहचान संबंधी विवाद, फर्जी दस्तावेज और प्रशासनिक कठिनाइयों को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
21 दिन तक आसान प्रक्रिया, उसके बाद बढ़ती जाएगी मुश्किल
वर्तमान व्यवस्था के तहत यदि बच्चे के जन्म के 21 दिनों के भीतर आवेदन किया जाता है, तो जन्म प्रमाण पत्र बिल्कुल सरल और नि:शुल्क प्रक्रिया से बन जाता है।
लेकिन देरी होने पर नियम लगातार सख्त होते जाते हैं।
वर्तमान व्यवस्था
- 21 दिन तक – नि:शुल्क पंजीकरण।
- 21 से 30 दिन – ₹20 विलंब शुल्क।
- 30 दिन से 1 वर्ष – तहसीलदार/ईओ की अनुमति और ₹50 लेट फीस।
- 1 वर्ष के बाद – एसडीएम की अनुमति और ₹100 लेट फीस।
नए विधेयक के बाद क्या होगा?
यदि संशोधन लागू होता है तो देर से जन्म प्रमाण पत्र बनवाना काफी कठिन हो जाएगा।
1 से 2 वर्ष की देरी
बच्चे के जन्म के एक वर्ष से दो वर्ष के बीच आवेदन करने पर जिला मजिस्ट्रेट (DM), एसडीएम (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी।
2 वर्ष से अधिक की देरी
दो वर्ष से अधिक विलंब होने पर जन्म प्रमाण पत्र केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही जारी किया जा सकेगा।
यानी भविष्य में केवल आवेदन भर देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है।
बिना नाम के भी बन सकता है जन्म प्रमाण पत्र
अक्सर अस्पतालों में माता-पिता बच्चे का नाम तय नहीं कर पाते, जिसके कारण प्रमाण पत्र बनवाने में देरी हो जाती है।
लेकिन अधिकारियों के अनुसार इसके लिए घबराने की जरूरत नहीं है।
बिना नाम का जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जा सकता है और बाद में निर्धारित नियमों के अनुसार नाम जोड़ा जा सकता है।
नाम जोड़ने के नियम
यदि बिना नाम का जन्म प्रमाण पत्र जारी हुआ है—
- एक वर्ष के भीतर केवल आवेदन देकर नाम जोड़ा जा सकता है।
- एक से पंद्रह वर्ष के बीच आवेदन के साथ एफिडेविट और बच्चे के नाम का कोई पहचान पत्र देना होगा।
- पंद्रह वर्ष की आयु पूरी होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र में नाम जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है।
नाम बदलने के नियम भी जान लीजिए
यदि माता-पिता जन्म के बाद बच्चे का नाम बदलना चाहते हैं—
- एक वर्ष के भीतर आवेदन और एफिडेविट के आधार पर नाम बदला जा सकता है।
- एक वर्ष बाद नाम बदलने पर पुराने नाम के साथ “उर्फ (Alias)” जोड़कर नया नाम दर्ज किया जाएगा।
किसकी होगी जिम्मेदारी?
जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं की होगी।
- सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑफिसर इनचार्ज (MOIC) की जिम्मेदारी होगी कि डिस्चार्ज से पहले प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत अधिकारी रजिस्ट्रार होंगे।
- नगर निगम और नगर निकायों में स्वास्थ्य अधिकारी या अधिशासी अधिकारी (EO) यह कार्य करेंगे।
- निजी अस्पतालों को नवजात और माता-पिता की जानकारी समय पर संबंधित निकाय को भेजना अनिवार्य होगा।
1 अक्टूबर 2023 से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी के अनुसार, 1 अक्टूबर 2023 से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के माध्यम से ऑनलाइन कर दी गई है।
हालांकि तकनीकी कारणों या कार्यभार के चलते कभी-कभी प्रमाण पत्र जारी होने में देरी होती है, लेकिन विभाग समय पर दस्तावेज उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास कर रहा है।
उत्तराखंड में क्यों बढ़ रहे हैं जन्म प्रमाण पत्र?
सीआरएस के ऑनलाइन होने के बाद उत्तराखंड में जन्म प्रमाण पत्र जारी होने की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
इसकी वजह केवल नए जन्म नहीं हैं, बल्कि वर्षों पहले जन्मे ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अब ऑनलाइन व्यवस्था के कारण अपना जन्म प्रमाण पत्र बनवाया है।
राज्य स्तर के आंकड़े
| वर्ष | जन्मे बच्चे | जारी जन्म प्रमाण पत्र |
|---|---|---|
| 2023-24 / 2023 | 1,51,007 | 2,27,990 |
| 2024-25 / 2024 | 1,47,717 | 2,77,697 |
| 2025-26 / 2025 | 1,53,299 | 2,81,344 |
स्पष्ट है कि जारी प्रमाण पत्रों की संख्या वास्तविक जन्मों से कहीं अधिक है, क्योंकि पुराने छूटे हुए पंजीकरण भी अब तेजी से हो रहे हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा प्रमाण पत्र बने?
वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार—
- हरिद्वार – 58,009
- ऊधम सिंह नगर – 56,086
- देहरादून – 51,814
- नैनीताल – 24,927
- पौड़ी गढ़वाल – 19,696
वहीं पर्वतीय जिलों में अल्मोड़ा (10,856), पिथौरागढ़ (10,407), उत्तरकाशी (12,948), टिहरी (15,439) सहित अन्य जिलों में भी ऑनलाइन पंजीकरण के बाद उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
