“रसूखदार मधुशाला: जब खाकी भी बहक गई!”
आशीष ने चाय की गर्म चुस्की लेते हुए धमाकेदार अंदाज़ में कहा, “विनोद भैया, आज की चाय के साथ समोसे भी हैं, और साथ में एक चटपटी कहानी भी! तैयार हो जाओ, क्योंकि आज रोमियो लेन की ‘रसूखदार मधुशाला’ की नई दास्तान सुनानी है!”
विनोद ने चमकती आँखों से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “वाह भैया, चाय, समोसे और आपकी कहानियाँ—तीनों का मज़ा एक साथ, जैसे तीनों में जादू हो!”
आशीष ने आग की तरह तेज़ी से कहा, “तो सुनो, वो दिन याद है जब वहाँ नियम-कायदों की धज्जियाँ उड़ाई जाती थीं और कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती थी? बड़े साहब वहीं महफ़िल जमाते थे—इतना कि भला कौन उन पर नज़र उठाए?”
विनोद ने ताज्जुब भरी मुस्कान में सिर हिलाया, “हाँ भैया, उन दिनों तो माहौल में ऐसा नशा होता था कि कोई भी आँख उठाने की हिम्मत नहीं करता था।”

आशीष ने चुटकी लेते हुए कहा, “और सुनो, मधुशाला के मालिक ने तो ऐसा सोचा, ‘नियमों की धज्जियाँ तो उड़ ही रही हैं, लेकिन भोकाल अभी भी ढीला है!’ तो उसने ठान लिया, ‘क्यों न राजा साहब की खाकी सेना से एक गनर साथ रख लूँ?’ सोचो, इससे रसूख में चार चाँद लग जाएँगे!”
विनोद ने हँसते हुए कहा, “वाह भैया, क्या दिमाग पाया है! सच में, दिल खोल के सोच लिया!”
आशीष ने गहरी सांस ली, चाय की गर्म चुस्की के साथ कहा, “एक दिन बड़े साहबों की महफ़िल में, ग्लास पर ग्लास खाली हो रहे थे, और हमारे मधुशाला के मालिक ने जोरदार प्रस्ताव रखा— ‘मुझे खाकी सेना से एक गनर मिल जाए, तो मेरा भोकाल टाइट हो जाएगा।'”
विनोद ने आंखें चौंधाई से खोलीं, “अरे भैया, तो क्या बोले बड़े साहब? मना कर दिया?”
आशीष ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बड़े साहब लोग भी ठहरे दिलदार! उन्होंने कहा, ‘ दे दो इसे गनर, अब सिर्फ मधुशाला नहीं ये भी “रसूखदार” कहलाएगा!’ पर जैसे ही गनर देने की तैयारी शुरू हुई, सब धड़ाम, टाटा, गुड बाई हो गई!—अरे मधुशाला जो सीज हो गई!”
विनोद ने चौंकते हुए कहा, “अरे भैया, ये तो बड़ा झटका लगा! लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, रोमियो लेन की इस ‘रसूखदार मधुशाला’ की तो अभी भी कई अनकही कहानियाँ बाकी हैं।”
आशीष ने समोसे का टुकड़ा उठाते हुए कहा तो विनोद, चौपाल पर तुम जमकर बैठे रहो! जब इस ‘रसूखदार मधुशाला’ ने कानून की धज्जियाँ उड़ाने का नया फंडा मार लिया, और साथ ही खाकी सेना का गनर भी दस्तक देने लगा, तो समझो बड़े साहबों की सांठगांठ का मखोल चरम पर पहुँच गया! अगली चाय की चुस्की, समोसे और चटपटी कहानी के साथ हम फिर मिलेंगे—तब तक देखते रहो कि ये रसूख की दास्तान कहाँ तक गगन छूती है और कितने धांसू सौदे, गुप्त समझौते, और मखोल के खेल इस मखोल-नुदाति माहौल को और भी जोरदार हिट कर देते हैं!
