होटल अलकनंदा पर सियासी संग्राम, कांग्रेस का धरना तो बीजेपी ने दिखाए काले झंडे
हरीश रावत ने सरकार पर लगाए आरोप
कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में विधायक अनुपमा रावत, रवि बहादुर समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर सरकारी संपत्तियों को लीज के नाम पर कम कीमत में निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा के कोष में भले ही वृद्धि हो जाए, लेकिन उत्तराखंड आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा।
हरीश रावत ने होटल अलकनंदा को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना था कि भाजपा सरकार पहले ही होटल के बराबर में स्थित दूसरी संपत्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को जमीन देकर गलती कर चुकी है, जबकि स्वाभाविक रूप से होटल अलकनंदा उत्तराखंड के हिस्से में आना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार होटल को भी कौड़ियों के भाव लीज पर देने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस बोली- सरकारी संपत्तियों का निजीकरण नहीं होने देंगे
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी का कहना है कि होटल अलकनंदा के निजीकरण का विरोध जारी रहेगा। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि प्रदेश में जहां भी सरकारी संपत्तियों को बेचने या लीज पर देने का फैसला लिया जाएगा, वहां विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
काले झंडे लेकर कांग्रेस के विरोध में उतरी भाजपा
कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी सरकार के फैसले के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया। भाजपा कार्यकर्ता बैरागी कैंप के गेट पर एकत्र हुए और हाथों में काले झंडे लेकर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करने निकले। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया, जिससे शांति व्यवस्था बनी रहे।
भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस के विरोध को चुनावी राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार राज्य की सरकारी संपत्तियों को संरक्षित करने और उनसे राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। ऐसी संपत्तियों से होने वाली आय प्रदेश के विकास में काम आएगी।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से होटल अलकनंदा की जिस संपत्ति पर उत्तराखंड का अधिकार नहीं था, उसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने दोनों राज्यों की आपसी सहमति से उत्तराखंड को दिलाया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने पहले इस संपत्ति की सुध नहीं ली और अब चुनाव नजदीक आने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
1964 में बना था होटल अलकनंदा
होटल अलकनंदा का विवाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा रहा है। हरिद्वार पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। वर्ष 1964 में यूपी सरकार ने गंगा नहर के किनारे होटल अलकनंदा का निर्माण कराया था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा लंबे समय तक पूरा नहीं हो पाया। इसके चलते होटल को लेकर दोनों राज्यों के बीच खींचतान जारी रही और मामला अदालत तक भी पहुंचा।
आखिरकार वर्ष 2023 में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच सहमति बनी और होटल अलकनंदा उत्तराखंड के हिस्से में आ गया। इसके बदले उत्तराखंड सरकार ने होटल के बराबर में स्थित उतनी ही जमीन उत्तर प्रदेश को दी। इसके बाद यूपी सरकार ने वहां अपना अलग होटल बनाया, जिसका नाम ‘होटल भागीरथ’ रखा गया।
30 कमरों वाले होटल के संचालन की नई योजना
फिलहाल होटल भागीरथ का संचालन उत्तर प्रदेश सरकार पीपीपी मोड पर कर रही है, जबकि होटल अलकनंदा का संचालन उत्तराखंड सरकार के अधीन गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के माध्यम से हो रहा है।
होटल अलकनंदा में कुल 30 कमरे हैं। यहां अलकनंदा घाट और आकर्षक लॉन भी मौजूद है। गंगा किनारे स्थित होने के कारण यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। होटल में कमरों का किराया 3,900 रुपये से लेकर 7,875 रुपये तक है।
हालांकि, रखरखाव की कमी के चलते होटल का संचालन बेहतर तरीके से नहीं हो पा रहा है। जीएमवीएन के माध्यम से संचालन जारी रहने के बावजूद होटल की व्यवस्थाओं और मेंटेनेंस को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने होटल को पीपीपी मोड पर संचालित करने की योजना तैयार की है।
लेकिन योजना के लागू होने से पहले ही इसका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस इसे सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने का फैसला बता रही है, जबकि भाजपा सरकार के कदम को संपत्ति के बेहतर उपयोग और राजस्व बढ़ाने की पहल बता रही है।
हरिद्वार में बढ़ी राजनीतिक हलचल
होटल अलकनंदा अब केवल परिसंपत्तियों के बंटवारे और संचालन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र भी बन गया है। एक ओर कांग्रेस सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे रही है, वहीं भाजपा इसे राज्य के हित में उठाया गया कदम बता रही है। ऐसे में पीपीपी मोड पर होटल के संचालन की योजना पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

