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उत्तराखंड में वन्यजीवों का बढ़ा आतंक, कहीं गुलदार ने ली बच्ची की जान तो कहीं हाथियों का उत्पात

उत्तराखंड में सर्दियों की दस्तक के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगली जानवरों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ने से लोग दहशत में हैं। पौड़ी में गुलदार के हमले में पांच वर्षीय बच्ची की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। वहीं, चमोली में भालू गौशालाओं को निशाना बनाकर मवेशियों की जान ले रहे हैं। दूसरी ओर, हरिद्वार में हाथियों के झुंड रिहायशी इलाकों, सड़कों और मंदिर परिसरों तक पहुंच रहे हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

पौड़ी में गुलदार के हमले से बच्ची की मौत, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार के हमलों का सिलसिला लंबे समय से जारी है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों में पिछले एक साल के दौरान गुलदार के हमले की लगभग 15 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें 12 लोगों की जान जा चुकी है। अब गुलदार की बढ़ती सक्रियता के बीच घरों के आंगन तक बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

ताजा घटना मंगलवार शाम खांड्यूसैंण क्षेत्र के वजली गांव में हुई। यहां करीब पांच वर्षीय आरुषि घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान गुलदार ने अचानक हमला कर दिया और बच्ची को उठाकर झाड़ियों की ओर ले गया। परिजनों और ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची का शव घर से कुछ दूरी पर बरामद हुआ।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी जब मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका घेराव कर लिया। लोगों ने लगातार हो रहे गुलदार के हमलों और वन विभाग की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। विरोध के दौरान विधायक की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया गया और उन्हें काफी देर तक वाहन के भीतर ही रहना पड़ा। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला गाड़ी के बोनट पर चढ़ गई और वन मंत्री सुबोध उनियाल व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब डेढ़ से दो घंटे तक क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। ग्रामीण देर रात तक वन मंत्री पौड़ी आओ, गुलदार-भालू से हमें बचाओ के नारे लगाते रहे।

गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव के मुताबिक, घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्ताव भेजा गया है। विभाग की टीम क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर नजर रख रही है। इसी बीच कोटद्वार क्षेत्र में भी गुलदार के एक बच्ची पर हमले की घटना सामने आई, जहां उसकी मां ने साहस दिखाते हुए बच्ची को गुलदार के चंगुल से छुड़ा लिया।

हरिद्वार में सड़कों और मंदिरों तक पहुंच रहे हाथी

पहाड़ों में गुलदार और भालू की बढ़ती सक्रियता के बीच हरिद्वार में हाथियों की आवाजाही ने भी चिंता बढ़ा दी है। राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग से सटे इलाकों में हाथियों का आबादी की ओर आना लगातार जारी है।

2 नवंबर को भेल स्टेडियम से आगे सड़क पर हाथी के पहुंचने और गोल चौराहे पर खड़े होने से लोगों में दहशत फैल गई। इसके अगले दिन 3 नवंबर को लालढांग क्षेत्र में चार हाथियों का झुंड खाकीर बाबा मंदिर परिसर में पहुंच गया। यह घटना सोमवार रात करीब 10 बजे की है। इसी दिन हरिद्वार-लक्सर मार्ग पर भी एक हाथी गलियों में घूमता दिखाई दिया।

हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के अनुसार, करीब 16 से 17 हाथी ऐसे हैं, जो आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही करते हैं। विभाग झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथियों की पहचान कर रहा है। योजना के तहत चिह्नित छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाए जाने हैं, ताकि उनकी गतिविधियों की जानकारी मिल सके और आबादी की ओर बढ़ने पर समय रहते वन विभाग की टीम को अलर्ट किया जा सके।

इस काम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का सहयोग लिया जा रहा है। इसके अलावा मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 75 हाथी मित्रों की तैनाती का प्रस्ताव भी जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी है।

चमोली में गौशालाओं को निशाना बना रहे भालू

चमोली जिले के पोखरी विकासखंड की चंद्रशिला पट्टी में भालुओं की बढ़ती सक्रियता ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। भालू जंगलों से निकलकर गौशालाओं में घुस रहे हैं और वहां बंधे मवेशियों पर हमला कर रहे हैं। एरोली, भिकोना और बंगथल गांवों में गौशालाओं की छत और दरवाजे तोड़कर मवेशियों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं।

2 नवंबर को नंदासैंण क्षेत्र के एरोली गांव में भालू ने गौशाला की छत तोड़कर अंदर बंधे दो बैलों पर हमला कर दिया। इसमें एक बैल की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इसी दिन भिकोना गांव में दर्शन सिंह की गौशाला में घुसे भालू ने एक बैल को मार डाला। इससे पहले बंगथल गांव में भी भालू ने एक बैल की जान ले ली थी और दूसरे को घायल कर दिया था।

डुंगर, कांडई चंद्रशिला, जौरासी और किमोठा समेत कई गांवों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों के लिए मवेशियों की मौत बड़ा आर्थिक नुकसान बन रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष वन्यजीवों के हमलों में करीब 40 मवेशियों की मौत हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 15 मवेशियों के मारे जाने की बात विभाग की ओर से कही गई है। ज्योतिर्मठ, पोखरी और दशोली क्षेत्र में भालुओं की सक्रियता अधिक बताई जा रही है।

केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के अनुसार, भालू सर्वाहारी जीव है। उसके भोजन में फल, जड़ें, घास, कीड़े-मकोड़े, छोटे स्तनधारी और मांस शामिल हैं। विभाग भालुओं के व्यवहार और गतिविधियों का अध्ययन कर रहा है। रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी की योजना बनाई जा रही है। भिकोना क्षेत्र में ड्रोन की मदद से भालू की लोकेशन और संभावित आवास का पता लगाने का प्रयास भी किया गया।

इससे पहले 3 सितंबर को चमोली के नेल गांव के सिदेली तोक में जंगल में घास लेने गई दो महिलाओं की भालू से बचने के प्रयास में खाई में गिरने से मौत हो गई थी। वहीं, दिसंबर 2025 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिशंकर में भालू के घुसने से दो छात्र घायल हुए थे।

उत्तरकाशी से चमोली तक बढ़ी चिंता

पहाड़ी क्षेत्रों में भालुओं की सक्रियता केवल मवेशियों तक सीमित नहीं है। जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों, पशुपालकों और बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन रही है। गौशालाओं में लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। वहीं पौड़ी में गुलदार के हमलों की घटनाओं ने गांवों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा मान चुकी है सरकार

राज्य में लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने 25 सितंबर को मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा के रूप में मान्यता देने और जिला स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समितियों के गठन का निर्णय लिया था।

8 अक्टूबर को वन्यजीव सप्ताह के समापन समारोह में राज्यपाल ने भी इस फैसले पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और मुआवजा मिलना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को प्रभावी बनाया जाना जरूरी है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि उत्तराखंड में कहीं भी वन्यजीव या इंसान की जान जाना सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। पौड़ी की घटनाओं को लेकर भी वह अधिकारियों के संपर्क में हैं।

फिलहाल, पहाड़ों में गुलदार और भालू के हमलों से लेकर मैदानी इलाकों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही तक, मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में लोगों को सुरक्षा देने के साथ वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और संघर्ष रोकने के उपायों को जमीन पर उतारना भी जरूरी हो गया है।

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