ISRO की बड़ी कामयाबी: अंतरिक्ष में पहुंचा NVS-03 सैटेलाइट, 56 दिनों में तैयार मिशन ने रचा इतिहास
GSLV-F18 रॉकेट से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ NVS-03, चार सक्रिय सैटेलाइट के साथ फिर मजबूत हुआ भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC
हैदराबाद: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की रात इसरो ने अपने नए नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया। इस मिशन की सफलता के साथ भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC एक बार फिर कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइट के साथ काम करने की स्थिति में पहुंच गया है। खास बात यह है कि इसरो ने इस पूरे मिशन को महज 56 दिनों में तैयार किया।
रात 11:51 बजे अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ रॉकेट
शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F18 रॉकेट ने उड़ान भरी। करीब 50 मीटर ऊंचे इस रॉकेट के तीनों चरणों ने निर्धारित तरीके से काम किया। मिशन के लिए सबसे अहम माने जाने वाले ऊपरी क्रायोजेनिक स्टेज ने भी बिना किसी गड़बड़ी के अपना काम पूरा किया।
उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट बाद NVS-03 सैटेलाइट सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग होकर जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में पहुंच गया। इस कक्षा की पृथ्वी से न्यूनतम दूरी 170 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 37,023 किलोमीटर है।
अब सैटेलाइट अपने इंजन की मदद से कक्षा में आगे बढ़ते हुए 32.5 डिग्री पूर्व स्थित अपने निर्धारित अंतिम स्थान तक पहुंचेगा।
इस बार इसरो ने अपनाया नया तरीका
NVS-03 मिशन में इसरो ने सुरक्षा के लिहाज से एक नया प्रयोग भी किया। सैटेलाइट के पायरोटेक्निक वाल्व पहले से ही खुले रखे गए थे। इसरो ने इससे पहले किसी मिशन में इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया था।
लॉन्चिंग सफल होने के बाद अब सैटेलाइट को उसकी अंतिम कक्षा तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम और लिक्विड अपोजी मोटर की मदद से कई बार ऑर्बिट-रेजिंग मैन्यूवर्स किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं।
NavIC के लिए क्यों अहम है NVS-03
भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC अमेरिकी GPS की तरह पोजिशन, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसका कवरेज भारत के साथ आसपास के लगभग 1,500 किलोमीटर क्षेत्र तक है।
NVS-03 के लॉन्च से पहले NVS-01 समेत तीन सैटेलाइट काम कर रहे थे। नए सैटेलाइट के शामिल होने से इनकी संख्या चार हो गई है। इससे NavIC की नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं को फिर से बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
NavIC का इस्तेमाल ट्रेनों, वाहनों और जहाजों की रियल टाइम ट्रैकिंग में किया जा सकता है। इसके अलावा आम लोगों के लिए भी यह सिस्टम महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में लीगल मेट्रोलॉजी (Indian Standard Time) Rules, 2026 अधिसूचित किए हैं। इनमें ‘वन नेशन, वन टाइम’ परियोजना भी शामिल है। NavIC इस परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में एक समान और सटीक समय सुनिश्चित करना है।
2,232 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक
NVS-03 सैटेलाइट का वजन 2,232 किलोग्राम है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में भारत में निर्मित रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक शामिल है। इसके साथ कुछ एटॉमिक क्लॉक विदेश से भी मंगाई गई हैं।
यह सैटेलाइट L1, L5 और S बैंड में सिग्नल प्रसारित करेगा। इन तीनों बैंड की मदद से भारत के नेविगेशन सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा।
56 दिनों में मिशन तैयार, इसरो ने बनाया नया रिकॉर्ड
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर बताया कि इसे केवल 56 दिनों में तैयार किया गया। दो GSLV मिशनों के बीच इससे पहले इतना कम अंतराल कभी नहीं रहा था।
उन्होंने बताया कि मिशन के कुल बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों को मिला है। यह अंतरिक्ष अभियानों में घरेलू उद्योगों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।
इस दौरान इसरो प्रमुख ने सितंबर में लॉन्च किए गए EOS-05 सैटेलाइट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह सैटेलाइट वर्तमान में काफी अच्छे डेटा उपलब्ध करा रहा है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई
NVS-03 के सफल प्रक्षेपण पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसरो की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता का उदाहरण बताया। साथ ही कहा कि यह सफलता विक्रम साराभाई और सतीश धवन के सपनों को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
फिलहाल NVS-03 अपनी निर्धारित अंतिम कक्षा की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे 32.5 डिग्री पूर्व स्थित जियोसिंक्रोनस/GEO स्लॉट में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट अपना निर्धारित संचालन शुरू करेगा और भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा।

