YouTube से सीखा शतरंज, 11 साल की भारतीय बेटी ने तोड़ दिया 38 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड!
कभी YouTube से शतरंज की चालें सीखने वाली भारतीय मूल की 11 वर्षीय बोधना शिवनंदन ने अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली है। इंग्लैंड की इस नन्ही खिलाड़ी ने हंगरी की महान शतरंज खिलाड़ी जुडिथ पोल्गर का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है।
भारतीय मूल की इंग्लिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवनंदन ने महज 11 साल और सात महीने की उम्र में इंटरनेशनल मास्टर (IM) बनने की उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही वह शतरंज के इतिहास में यह खिताब हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
इससे पहले यह रिकॉर्ड हंगरी की जुडिथ पोल्गर के नाम था, जिन्होंने वर्ष 1988 में 12 साल की उम्र में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल किया था। अब करीब 38 साल बाद बोधना ने उनका रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
यूरोपियन क्लब कप में चली इतिहास बदलने वाली चाल
इंग्लैंड के हैरो की रहने वाली स्कूली छात्रा बोधना ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि मोंटेनेग्रो के बुडवा में आयोजित यूरोपियन क्लब कप 2026 में हासिल की।
टूर्नामेंट शुरू होने से पहले उन्हें पोल्गर का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए कुछ ही रेटिंग अंकों की जरूरत थी। प्रतियोगिता के तीसरे दौर में उन्होंने बेलारूस की इंटरनेशनल मास्टर ओल्गा बाडेलका को हराया। इसके बाद अगले दौर में जॉर्जिया की ग्रैंडमास्टर निनो बाटसियाशवी के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ खेला।
इसके बाद स्वीडन की महिला इंटरनेशनल मास्टर विक्टोरिया जोहानसन पर जीत दर्ज करते ही बोधना ने वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसने उन्हें शतरंज के इतिहास में एक नई पहचान दिला दी।
इस उपलब्धि के साथ बोधना दुनिया के दस सबसे कम उम्र के इंटरनेशनल मास्टर्स की सूची में भी शामिल हो गई हैं। इस प्रतिष्ठित सूची में भारत के आर प्रज्ञानानंदा और डी गुकेश के अलावा उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव, अर्जेंटीना के फास्टिनो ओरो, तुर्किये के यागिज खान और रूस के रोमन एस जैसे खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं।
शतरंज जगत ने दी बधाई, मैल्कम पेन ने बताया असाधारण प्रतिभा
बोधना की इस ऐतिहासिक सफलता पर यूरोपीय शतरंज यूनियन और इंग्लिश चेस फेडरेशन ने उन्हें बधाई दी है।
इंग्लिश चेस फेडरेशन के इंटरनेशनल चेस डायरेक्टर और इंटरनेशनल मास्टर मैल्कम पेन ने बोधना की प्रतिभा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बोधना ऐसी प्रतिभा हैं, जो किसी पीढ़ी में एक बार देखने को मिलती है। वह भविष्य में क्या कुछ हासिल कर सकती हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है।
यूरोपीय शतरंज यूनियन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बोधना को बधाई देते हुए लिखा कि 11 वर्षीय बोधना शिवनंदन ने यूरोपीय शतरंज क्लब कप 2026 के अंतिम दौर में जीत दर्ज कर इंटरनेशनल मास्टर बनने की उपलब्धि हासिल की है।
पांच साल की उम्र में शुरू हुआ सफर, YouTube बना पहला सहारा
बोधना के शतरंज खिलाड़ी बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। जिस खेल में आज वह दुनिया के बड़े रिकॉर्ड तोड़ रही हैं, उससे उनका परिचय महज पांच साल की उम्र में लॉकडाउन के दौरान हुआ था।
दरअसल, उनके पिता के एक दोस्त अपने गैराज की सफाई कर रहे थे और वहां रखा एक शतरंज सेट फेंकने की सोच रहे थे। बोधना के पिता शिवनंदन वेलायुथम, जिन्हें शिवा भी कहा जाता है, उस सेट को किसी को दान देने के इरादे से घर ले आए।
लेकिन घर में रखे शतरंज के राजा और घोड़े जैसे मोहरों ने छोटी बोधना का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहीं से उनकी इस खेल में दिलचस्पी शुरू हुई।
धीरे-धीरे उन्होंने YouTube पर शतरंज के वीडियो देखकर खेल की बारीकियां सीखनी शुरू कर दीं। इसके साथ ही वह ऑनलाइन अनजान खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले खेलने लगीं। पांच साल की उम्र में शुरू हुआ यही सफर आज उन्हें शतरंज की दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में शामिल कर चुका है।
नौ साल की उम्र में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व, फिर बनीं महिला ग्रैंडमास्टर
बोधना का शतरंज करियर लगातार नई उपलब्धियों से भरा रहा है। महज नौ साल की उम्र में वह किसी भी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई थीं।
अगस्त 2026 में उन्होंने ब्रिटिश महिला शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की। इसके बाद सितंबर में उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित शतरंज ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 मुकाबलों में आठ अंक हासिल किए और महिला ग्रैंडमास्टर का खिताब भी प्राप्त किया।
अब अक्टूबर 2026 में इंटरनेशनल मास्टर बनकर उन्होंने अपने करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ ली है।
क्या होता है इंटरनेशनल मास्टर का खिताब
शतरंज में इंटरनेशनल मास्टर (IM) एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब है। इसे हासिल करने के लिए खिलाड़ी को तीन टूर्नामेंटों में निर्धारित प्रदर्शन स्तर यानी ‘नॉर्म्स’ पूरे करने होते हैं। इसके अलावा कम से कम 2400 की FIDE रेटिंग हासिल करना भी जरूरी होता है।
यह खिताब पुरुष और महिला दोनों खिलाड़ियों के लिए समान है। शतरंज में इसे सर्वोच्च खिताब ग्रैंडमास्टर (GM) से ठीक नीचे रखा जाता है।
तमिलनाडु से जुड़ी हैं बोधना की जड़ें
भले ही बोधना का जन्म और पालन-पोषण ब्रिटेन की राजधानी लंदन में हुआ हो, लेकिन उनका भारत से गहरा रिश्ता है।
उनके परिवार की जड़ें तमिलनाडु के त्रिची से जुड़ी हैं। उनका परिवार वर्ष 2007 तक वहीं रहा था। इसके बाद उनके पिता शिवनंदन वेलायुथम, जो पेशे से आईटी प्रोफेशनल थे, परिवार के साथ लंदन चले गए।
आज ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतीय मूल की यह नन्ही खिलाड़ी शतरंज की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही है। महज 11 साल की उम्र में जुडिथ पोल्गर जैसी महान खिलाड़ी का 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ना उनकी असाधारण प्रतिभा और लगातार बेहतर होते प्रदर्शन की बड़ी मिसाल बन गया है।

