कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नेताओं को ये क्या सुना गए मनवीर चौहान!
उत्तराखंड की सियासत में भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। सवाल उन नेताओं की हैसियत को लेकर उठ रहा है, जो अपनी पुरानी राजनीतिक निष्ठाएं छोड़कर भाजपा के कुनबे में शामिल हुए हैं। चौहान के बयान के बाद सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल है। वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए भाजपा पर चुटकी ली है।
दरअसल, खुद को अनुशासित, सभ्य, शालीन और विचारधारा आधारित पार्टी बताने वाली भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में ‘अच्छे दिन आएंगे’ का नारा दिया था। सत्ता हासिल करने के बाद दूसरे राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने भाजपा का रुख किया। पार्टी ने भी उनके स्वागत के लिए अपने दरवाजे खुले रखे। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि पुराने राजनीतिक रिश्ते तोड़कर कमल थामने वाले इन नेताओं की भाजपा में आखिर कितनी अहमियत है?
इस बहस की वजह बने हैं भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान। उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में यह संदेश निकाला जा रहा है कि दूसरे दलों से आने वाले नेताओं की भाजपा में हैसियत क्या है। बयान में सामने आए गधे-घोड़े के संदर्भ ने मामले को और गरमा दिया है।
इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी चौहान के बयान पर चुटकी लेते हुए सियासी पलटवार किया है। इसके बाद चर्चा सिर्फ चौहान के बयान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन नेताओं तक पहुंच गई है, जिन्होंने वर्षों पुरानी राजनीतिक निष्ठाएं छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
अब सवाल यह है कि क्या कमल थामने से पहले इन नेताओं को पार्टी में अपनी हैसियत का अंदाजा था? और चौहान के बयान के बाद उन नेताओं पर क्या बीत रही होगी, जिन्होंने बेहतर राजनीतिक भविष्य की उम्मीद में अपना पुराना ठिकाना छोड़ दिया?
उत्तराखंड की राजनीति में इस बयान ने एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। विपक्ष को भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिल गया है, जबकि दल बदलकर भाजपा में पहुंचे नेताओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

