गूगल अंतरिक्ष में करेगा AI चिप की टेस्टिंग, 1 अक्टूबर को लॉन्च होगा प्रोटोटाइप सैटेलाइट
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंप्यूटिंग की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। इसी दिशा में गूगल अब अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की संभावनाएं तलाश रहा है। कंपनी ने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अपने टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) की अंतरिक्ष में टेस्टिंग करने की तैयारी की है। इसके लिए एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के मुताबिक, प्रोजेक्ट सनकैचर का प्रोटोटाइप सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन 1 अक्टूबर को निर्धारित है। इस सैटेलाइट को गूगल ने प्लैनेट के साथ मिलकर तैयार किया है।
इस परीक्षण का मकसद यह जांचना है कि गूगल की TPU चिप्स अंतरिक्ष के वातावरण में सुरक्षित और प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं या नहीं। TPU गूगल की ओर से विकसित विशेष चिप है, जिसे मशीन लर्निंग और AI से जुड़े कंप्यूटिंग कार्यों को तेज करने के लिए डिजाइन किया गया है।
गूगल के प्रोजेक्ट सनकैचर के पीछे अंतरिक्ष में उपलब्ध सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर AI कंप्यूटिंग की क्षमता बढ़ाने का विचार है। कंपनी के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स को लंबे समय तक सूर्य की रोशनी मिल सकती है, जिससे धरती की तुलना में अधिक सौर ऊर्जा उपलब्ध होने की संभावना है।
गूगल भविष्य में कई सैटेलाइट्स को नेटवर्क के रूप में जोड़कर अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर AI कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार करने की संभावना तलाश रहा है। कंपनी का मानना है कि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हेल्थकेयर और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
गूगल की इस योजना को स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क का भी समर्थन मिला है। मस्क ने गूगल के एक वरिष्ठ अधिकारी का वीडियो साझा करते हुए भविष्य में कंप्यूटिंग के बड़े हिस्से के अंतरिक्ष में स्थानांतरित होने की संभावना जताई है।
अब प्रोजेक्ट सनकैचर के शुरुआती परीक्षण पर नजर है। 1 अक्टूबर को होने वाला मिशन यह पता लगाने में महत्वपूर्ण होगा कि अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की दिशा में गूगल की योजना तकनीकी तौर पर कितनी कारगर साबित होती है।
