उत्तराखंड

बद्रीनाथ धाम का ‘चंपत’ कौन? FIR के बाद जांच का दायरा बढ़ाना जरूरी

बद्रीनाथ धाम में दान और भेंट राशि से जुड़ी कथित हेराफेरी का मामला अब केवल मंदिर समिति की आंतरिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। कोतवाली श्री बद्रीनाथ में 8 जुलाई 2026 को FIR संख्या 0006 दर्ज हो चुकी है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 306 और 316(5) का उल्लेख है। यानी मामला अब सीधे कानून, आस्था और जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हुए सख्त तो मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन FIR दर्ज होने के बाद अब सवाल यह है कि क्या केवल तीन सदस्यीय जांच इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए पर्याप्त है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि बद्रीनाथ जैसे विश्व प्रसिद्ध धाम में दान और चढ़ावे की व्यवस्था में कोई एक कर्मचारी अकेले हेराफेरी कैसे कर सकता है? दानपात्र खुलने से लेकर गिनती, रजिस्टर एंट्री, CCTV निगरानी, जमा प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तक पूरी एक प्रक्रिया होती है। ऐसे में यदि गड़बड़ी हुई है, तो जांच भी पूरी चेन की होनी चाहिए!

इस मामले में CCTV फुटेज की तत्काल जांच जरूरी है। सिर्फ फुटेज देखकर औपचारिकता पूरी नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि कहीं कोई फुटेज डिलीट, एडिट या गायब तो नहीं की गई। अगर कैमरे लगे थे तो गड़बड़ी समय रहते पकड़ी क्यों नहीं गई? और अगर फुटेज उपलब्ध नहीं हैं, तो यह अपने आप में और बड़ा सवाल है।

बद्रीनाथ धाम में आए दान और भेंट सामग्री का हाई लेवल ऑडिट भी कराया जाना चाहिए। कितनी धनराशि आई, क्या क्या भेंट सामग्री मिली, रिकॉर्ड में क्या दर्ज हुआ, कितना जमा हुआ और कहां अंतर सामने आया, इसका पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।

राम मंदिर दान चोरी मामले ने देश को पहले ही दिखाया है कि धार्मिक स्थलों की दान व्यवस्था में सेंध लगने पर जांच यदि गहराई तक जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। बद्रीनाथ धाम के मामले में भी जांच केवल कर्मचारी स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी पता लगना चाहिए कि कहीं किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं रही।

भक्त बद्रीनाथ धाम में दान भगवान के नाम पर देता है, किसी व्यवस्था की कमजोरी या किसी की जेब भरने के लिए नहीं। बद्रीनाथ का चढ़ावा श्रद्धा की पूंजी है। उस पर हाथ डालना सिर्फ चोरी नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे से विश्वासघात है।

अब सवाल सीधे हैं,

FIR के बाद आगे की कार्रवाई कब होगी?

CCTV फुटेज की फॉरेंसिक जांच कब होगी?

दान और चढ़ावे का हाई लेवल ऑडिट कब होगा?

अगर कर्मचारी दोषी है, तो उसके पीछे जिम्मेदार कौन था?

और सबसे बड़ा सवाल,

बद्रीनाथ धाम का ‘चंपत’ कौन?

सरकार और जांच एजेंसियों को इस मामले में साफ, कठोर और पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी। दोषी चाहे कर्मचारी हो, अधिकारी हो या संरक्षण देने वाला कोई बड़ा चेहरा, जांच की आंच हर जिम्मेदार तक पहुंचनी चाहिए। क्योंकि बद्रीनाथ में सवाल केवल दान का नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास का है।

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