बद्रीनाथ में बिना अनुमति धार्मिक आयोजन पर सख्ती, 50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान
बदरीनाथ धाम में अब धार्मिक आयोजनों को लेकर सख्त नियम लागू किए जाने की तैयारी है। नगर पंचायत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार का भंडारा, भागवत कथा या अन्य धार्मिक कार्यक्रम बिना पूर्व अनुमति आयोजित नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के साथ अधिकतम 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
नगर पंचायत प्रशासन ने व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई उपविधियां तैयार की हैं। इन नियमों में बिना अनुमति झुग्गी-झोपड़ी या अस्थायी निर्माण पर रोक, मांसाहार के परिवहन और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध तथा स्वच्छता संबंधी सख्त प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही धार्मिक आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
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दरअसल, हर वर्ष यात्रा सीजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ पहुंचते हैं। इस दौरान कई बार बिना अनुमति धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर पंचायत ने यह कदम उठाया है, ताकि क्षेत्र में स्वच्छता, अनुशासन और धार्मिक गरिमा बनी रहे।
प्रशासन के अनुसार, अनुमति प्रक्रिया के साथ यूजर चार्ज भी लागू किया जाएगा, जिससे स्थानीय व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा सके। साथ ही आयोजनों और अस्थायी ठहराव के लिए शौचालयों की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा। ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ये नियम पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
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नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित ने बताया कि पिछले वर्षों में कुछ लोगों के मांस के साथ पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अस्थायी निर्माण करने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
गौरतलब है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी। इसके बाद 21 अप्रैल को केदारनाथ और 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में होने वाले धार्मिक आयोजनों को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
