नहीं सुलझी 23 साल की डॉ. तन्वी की मौत की गुत्थी, जांच में अभी भी रहस्य बरकरार
24 मार्च को जब पूरा देश नवरात्रि की षष्ठी मनाते हुए मां कात्यायनी की पूजा-उपासना में लगा हुआ था, उसी दिन देहरादून में एक दर्दनाक घटना ने सबको झकझोर दिया। हरियाणा के अंबाला सिटी की रहने वाली 23 वर्षीय डॉक्टर तन्वी की मौत हो गई। डॉ तन्वी देहरादून के पटेलनगर स्थित एक बड़े मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग चिकित्सा यानी ऑप्थल्मोलॉजी में मास्टर्स इन सर्जरी यानी एमएस की पढ़ाई कर रही थीं। अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि उनकी मौत आत्महत्या थी या फिर कोई और वजह थी।
डॉक्टर तन्वी की मौत को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है कि देश की एक होनहार डॉक्टर बिटिया की जान क्यों चली गई। उनके पिता ललित मोहन ने मेडिकल कॉलेज की नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है – पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉ तन्वी की कॉल डिटेल्स और कॉलेज से जुड़े तमाम तथ्यों की छानबीन की जा रही है।
डॉक्टर तन्वी हरियाणा के अंबाला सिटी के मॉडल टाउन की रहने वाली थीं। एमबीबीएस पूरा करने के बाद वे देहरादून में नेत्र रोग की स्पेशलाइजेशन कर रही थीं। वे अपनी मां के साथ देहरादून के देहराखास इलाके में रहती थीं। मौत से ठीक एक घंटे पहले उन्होंने अपने पिता से फोन पर बात की थी। पिता के मुताबिक बेटी बात करते समय बहुत परेशान लग रही थीं और उन्होंने अपनी सारी परेशानी बताई थी।
पिता का कहना है कि डॉ तन्वी के नंबरों को लेकर कुछ दिक्कत चल रही थी। पहले उनकी लॉग बुक में अच्छे अंक आते थे, लेकिन जब विभागाध्यक्ष बदली तो अंक कम आने लगे। आरोप ये भी है कि विभागाध्यक्ष ने कम अंक देकर फेल करने की धमकी तक दे दी थी। इसी वजह से पिछले चार महीनों से डॉ तन्वी गहरे तनाव में जी रही थीं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि डॉ तन्वी के पिता खुद पर्सनली नेत्र रोग विभागाध्यक्ष से मिले और अपनी बेटी के भविष्य को प्रभावित न करने की गुहार लगाई, लेकिन विभागाध्यक्ष का रवैया नहीं बदला।
24 मार्च की रात 11:15 बजे डॉ तन्वी ने अपने पिता को आखिरी मैसेज भेजा कि वे 12:30 बजे तक घर पहुंच जाएंगी। लेकिन ये उनका आखिरी मैसेज और आखिरी कॉल साबित हुआ। जब बेटी घर नहीं पहुंची और फोन भी स्विच्ड ऑफ हो गया तो घबराए पिता तुरंत अंबाला से देहरादून के लिए रवाना हो गए। अंबाला से देहरादून की करीब 200 किलोमीटर की दूरी उन्होंने महज 4 घंटे से भी कम समय में तय की।
देर रात अस्पताल मार्ग पर डॉ तन्वी की कार सड़क के किनारे खड़ी मिली। कार अंदर से पूरी तरह लॉक थी। परिजनों ने शीशा तोड़कर देखा तो अंदर डॉ तन्वी अचेत अवस्था में सीट पर पड़ी हुई थीं। उनके हाथ में कैनुला लगा हुआ था और कार में इंजेक्शन रखे हुए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पिता ललित मोहन ने बेटी की मौत के कुछ घंटे बाद ही नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करा दिया। अब पूरी जांच चल रही है और देश भर में इस मामले पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक मेडिकल स्टूडेंट को इतना तनाव क्यों दिया गया कि उसकी जिंदगी दांव पर लग गई। तीन दिन बीत गए, लेकिन अभी तक असली वजह का कोई खुलासा नहीं हुआ है।
